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हम गद्दारों की कौम होते तो एपीजे अब्दुल कलाम राष्ट्रपति नहीं होते

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हम गद्दारों की कौम होते तो एपीजे अब्दुल कलाम राष्ट्रपति नहीं होते l If we were the traitors, APJ Abdul Kalam would not have been the President

नागदा. हम गद्दारों की कौम होते तो एपीजे अब्दुल कलाम राष्ट्रपति नहीं होते। हम वतन के लिए लड़ने और मरने वाले लोग है। नमाज में सात बार जमीं को चुमते है और हमें  ही इस देश से, हमारे वतन से इस जमीं से निकालने की साजिश की जा रही है, जो हम बर्दाश्त नहीं करेंगे।

यह बात रविवार को सीएए के विरोध में इमामबाड़े पर आयोजित वक्ताआंे ने कहीं। धरने को प्रमुख रुप से रतलाम के एजाज खान, अभिभाषक ओमप्रकाश बोरासी, सालिहा, खाचरौद के काजी गुलगार व जामा मस्जिद के मुक्ति साहब ने संबोधित किया।

जीत गए तो वतन मुबारक, हार गए तो कत्ल मुबारक धरने को साहिला ने संबोधित कर कहा कि वतन हमारा है, हमारे पूर्वजों का खून भी इसमें मिला हुआ है। जमी की कीमत वो क्या जाने जो सिर्फ राजनीति कर बंटवारा कर रहे है। हम तो इस जमीं को इतना प्यार करते है कि सात बार नमाज में चूमते है।

उनके पास प्रशासन, पुलिस, आर्मी और सुप्रीम कोर्ट में बैठे नुमाइंदे है, जो उनके इशारे पर हर हरकत कर रहे है, लेकिन हम भी इस जमीं को छोड़ने वाले नहीं है। अगर जीत गए तो वतन मुबारक और हार गए तो कत्ल मुबारक।

छात्रा ने मॉडल से दिखाया, क्या होगा सीएए में धरने के दौरान समाज की छात्रा मंतशा खान ने मॉडल के माध्यम से बताया कि सीएए के अंदर किस तरह प्रक्रिया होगा। मंतशा के मुताबिक सभी को पहले एनआरसी में शामिल किया जाएगा।

इसमें जिसके पास दस्तावेज होंगे, उन्हें नागरिकता मिल जाएगी। शेष को डिटेंशन सेंटर मंे डाल दिया जाएगा। इसके बाद उन्हें सीएए में शामिल करते हुए मुस्लिम को छोड़कर अन्य धर्म के लोगों को नागरिकता दी जाएगी। बचे लोगों को पुन: डिटेंशन सेंटर भेज दिया जाएगा, जहां की जिंदगी जेल से बदतर होगी।

अनुमति मिलने पर दोबारा शुरू हुआ धरना शुक्रवार को जुम्मे की नमाज के बाद मुस्लिम समाजजनों व भीम आर्मी ने धरना शुरू किया था। अनुमति नहीं होने से प्रशासन के दबाव में समाजजनों ने शनिवार रात में धरने को ज्ञापन सौंपकर समाप्त कर दिया था।

शनिवार को ही समाजजनों ने धरने के लिए अनुमति का आवेदन भी कर दिया था, रविवार को उन्हें अनुमति का आदेश मिल गया। जिस पर उन्होंने दोबारा अनिश्चित कालीन धरना शुरू कर दिया है। कलेेक्टर कार्यालय से 7 दिन की अनुमति मिलने की बात समाजजनों द्वारा कहीं जा रही है। 

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