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लैक्सेस उद्योग का विस्तार : सुनवाई में हुआ हंगामा

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लैक्सेस उद्योग का विस्तार : सुनवाई में हुआ हंगामा Expansion of lanxess industry : Public hearing

नागदा।  मल्टीनेशनल कंपनी लैक्सेस उद्योग द्वारा किए जा रहे विस्तार को लेकर शनिवार को एसडीएम कार्यालय में लोक सुनवाई हुई। मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड व लैक्सेस कंपनी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित लोकसुनवाई लगभग 6 घंटे चली।

सुनवाई दोपहर 12 बजे प्रारंभ हुई जो शाम 6 बजे जारी रही। सुनवाई में लगभग 102 दावे, आपत्ती व सुझाव आए। जिन पर प्रदषण विभाग सुनवाई कर रिपोर्ट भारत सरकार के पर्यावरण मंत्रालय को प्रस्तुत करेगा।

जिस पर विचार-विमर्श कर अनुमति देना या नहीं देने पर निर्णय लिया जाएगा। लोक सुनवाई के दौरान कई बार विवाद कि स्थिती भी उत्पन्न हुई। लेकिन वहां पर मौजूद एसडीएम आरपी वर्मा व बिरलाग्राम थाना प्रभारी आईपीएस अभिनव चौकसे ने सख्त रवैया अपनाया और मामला शांत कराया।

सुनवाई में प्रदूषण विभाग उज्जैन, पुलिस प्रशासन व राजस्व विभाग के अधिकारी, शहर के गणमान्य नागरकि, व्यापारी व जनप्रतिनिधि मौजूद थे।

जर्मनी की कंपनी लैंक्सेस ने अपने उद्योग का विस्तार करने के लिए 390 करोड़ के निवेश की परियोजना को प्रस्तावित किया है। उद्योग के विस्तार से लगभग 100 लोगों को रोजगार मिलेगा।

वर्तमान में उद्योग में लगभग 870 ठेका श्रमिक कार्यरत हैं। लैंक्सेस में वर्तमान  में थायोनिल क्लोराइड का बड़ी मात्रा में उत्पादन होता है। वर्तमान में उद्योग प्रबंधन को 50 हजार मैट्रिक टन प्रतिवर्ष थायोनिल क्लोराइड की अनुमति मिली हुई है। जिसे कंपनी बढ़ाकर 20 हजार मैट्रिक टन और रसायन का उत्पादन करने के लिए कदम बढ़ा रही है।

इस प्रकार अब कुल 70 हजार मैट्रिक टन थायोनिल क्लोराइड का उत्पादन इस शहर में प्रतिवर्ष होगा। बताया जा रहा हैकि थायोनिल क्लोराइड के उत्पादन पर कुछ देशों ने प्रतिबंध भी लगा रखा है। लैक्सेस कंपनी के वर्तमान में लगभग 16  उत्पाद हैं।

अब कुल 6  नए उत्पाद सोडियम हाइपोक्लोराइट 250 मेट्रिक टन प्रतिवर्ष, अल्फा एमाइल सिनामाल्डिहाइ्रड 2000 मेट्रिक टन प्रतिवर्ष व सल्फयुरिक एसिड 6 000 मेट्रिक टन प्रतिवर्ष बनाने की अनुमति मांगी गई है। इसी प्रकार से सोडियम सैलिसिलेट 8 000 मैट्रिक टन, एन आक्टनल 5950 एवं सल्फर ट्राइआक्साइड 16,100 मैट्रिक टन प्रतिवर्ष बनाने की अनुमति मांगी है।

लोक सुनवाई में लगभग 82 लोगों ने आपत्ती जताई। साथ ही लगभग दो दर्जन लोगों ने सुझाव व सहमति प्रदान कि है। आपत्ती दर्ज कराने वाले लोगों को कहना था कि उद्योग के विस्तार से प्रदूषण बढ़ेगा, पहले प्रदूषण पर रोक लगाई जाए या प्रदूषण को कम किया जाए। जिसके बाद उद्योग का विस्तार हो। इधर सहमति देने वाले लोगों का कहना था कि उद्योग के विस्तार से श्हर में बेरोजगारी कम होगी।

सुनवाई के दौरान कई बार विवाद कि स्थिती उत्पन्न हुई। सुनवाई के प्रारंभ में उद्योग के तकनिकि अधिकारी ने उद्योग द्वारा सीएसआर फंड के तहत किया क्षेत्र में विकास कार्य बताए। इस पर उद्योग के प्रदूषण से प्रभावित 14 गांव के ग्रामीण गुस्सा हो गए और हंगामा कर दिया।

ग्रामीणों का कहना था कि शहर के किसी भी उद्योग द्वारा ग्रामीण क्षेत्र में उनके आर्थिक विकास के लिए कोई कार्य किया। इस पर प्रदूषण विभाग के क्षेत्रिय अधिकारी एसएन द्विवेदी व ग्रामीणों के बीच जमकर बहस हो गई।

मामला बढ़ता देख एसडीएम आरपी वर्मा ने ग्रामीणों को शांत कराया और उद्योग के अधिकारी का भाषण बंद कराया। सुनवाई के दौरान जब कुछ लोग उद्योग का पक्ष रख रहे थे उस समय भी ग्रामीणों ने हंगामा किया। इस बार आईपीएस अभिनव चौकसे ने ग्रामीणों को हिदायत दी और मामला शांत कराया।

सुनवाई कि अध्यक्षता एडीएम आरपी तिवारी, एसडीएम वर्मा, सीएसपी मनोज रत्नाकर, प्रदूषण विभाग के क्षेत्रिय अधिकारी द्विवेदी, प्रदूषण विभाग के सीनियर साइंटिस्ट डॉ एसके श्रृंगी, विधायक दिलीपसिंह गुर्जर, जिला कांग्रेस कार्यकारी अध्यक्ष सुबोध स्वामी, लैक्सेंस उद्योग के यूनिट हैड संजय सिंह, जनसंपर्क अधिकारी पिंटू दास, केमिकल डिवीजन के आरसी जांगीड़, श्रमिक नेता जितेंद्र रघुवंशी, गंगाराम गुर्जर, भाजपा नेता छोटे मल्लाहा, कांग्रेस नेता दिपक शर्मा, गोलू यादव, अभिषेक चौरसिया, आरटीआई कार्यकर्ता कैलाश सनोलिया, अभय चौपड़ा, योगेश शुक्ला, अब्दुल हमीद, भाजपा नेता रामसिंह शेखावत, संदीप चौधरी, नंदू गुर्जर, अभिभाषक सत्यनारायण पुरोहित, जगदीश चावड़ा आदि मौजूद थे।

गौरतलब है कि नागदा में स्थित तीन बड़े उद्योग ग्रेसिम, केमिकल व लैक्सेस उद्योग है। उक्त तीनों उद्योग द्वारा अपने-अपने उद्योग का विस्तार किया जा रहा है। ग्रेसिम व केमिकल डिवीजन के कुल 3600 करोड़ का निवेश कर औद्योगिक विस्तार किया जा रहा है। पूर्व में इन दोनों उद्योग की सुनवाई हो चुकी है।

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