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CMIE सर्वे/और बढ़ा लॉकडाउन, तो देश के एक तिहाई परिवारों पर आर्थिक संकट, नौकरी पेशा आबादी के 25% लोग होंगे बेरोजगार

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-लॉकडाउन 3.0 का तीसरा चरण 17 मई को होगा खत्म, 4.0 नए रंग रुप के साथ होगा शुरू.
-मासिक वेतन 10 हजार लेने वाले लोगों की जल्द नहीं की मदद, तो कुपोषण जैसी विकट समस्या आएगी सामने.

नई दिल्ली. कोरोना महामारी पर लगाम कसने के लिए सरकार ने 25 मार्च से लॉकडाउन की शुरुआत की थी. तीसरा फेज 17 मई को समाप्त होकर लॉकडाउन 4.0 18 मई से नए रंग रुप में शुरू होगा.

जिसकी पुष्टी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार रात 8 बजे देश को संबोधित करते हुए की. सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (CMIE) के रिसर्च सर्वे में स्पष्ट हुआ है कि, यदि लॉकडाउन एक सप्ताह और बढ़ा तो देश के एक तिहाई परिवारों के समक्ष आर्थिक संकट खड़ा होगा.

कारण उक्त परिवारों के पास जीवन यापन के लिए आवश्यक सामग्री समाप्त हो जाएंगी. नौकरी पेशा आबादी के 25प्रतिशत लोग होंगे बेरोजगार होंगे.

भारत के 84 % परिवारों की आमदनी गिरी

सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी ने मध्यम वर्गीय परिवारों की आमदनी को लेकर स्टडी की. जिसमें खुलासा हुआ है कि, तीन चरणों के लॉकडाउन में 84 प्रतिशत परिवारों की आमदनी में गिरावट दर्ज हुई है. इतना ही नहीं देश के नौकरी पेशा और कामकाजी आबादी के 25 % लोग प्रत्यक्ष रुप से बेरोजगार हो चुके हैं.

देश में 34 प्रतिशत परिवारों की आर्थिक स्थिति खराब

सीएमआईई के चीफ इकनॉमिस्ट कौशिक कृष्णन ने दैनिक भास्कर से साझा की जानकारी में कहा है कि, पूरे देश के 34 % घरों की आर्थिक स्थिति चरमरा गई है.

मध्यमवर्गीय परिवारों के पास पयाप्र्त मात्रा में खाद्यान सामग्री नहीं है, एक अनुमान के अनुसार परिवारों के पास एक सप्ताह की ही जीवन यापन का सामान शेष है. यदि ऐसे परिवारों को जल्द से जल्द आर्थिक मदद नहीं दी गई तो इनके समक्ष कुपोषण जैसी समस्या उत्पन्न होगी.

2.70 करोड़ युवा बेरोजगार

सीएमआईई की एक स्टडी में उल्लेख किया गया है कि, भारत में बेरोजगारी दर तेजी से बढ़ी है. 21 मार्च को भारत में बेरोजगारी की दर 7.4 फीसदी देखने को मिली थी, जो 5 मई तक बढ़कर 25.5 फीसदी पहुंच गई. रिसर्च में सामने आया है कि, देश के 25 से 30 आयु वर्ग के 2.70 करोड़ युवा अप्रैल में बेरोजगार हो चुके हैं.

बिहार, हरियाणा, झारखंड राज्यों की स्थिति चिंताजनक

लॉकडाउन के चलते नौकरीपेशा लोग बेरोजगार हुए. जिससे लोगों की आमदनी पर असर पड़ा. भारत के शहरी क्षेत्रों में 65 फीसदी परिवारों के पास एक सप्ताह का राशन और जीवन संसाधन साम्रगी शेष है.

वहीं ग्रामीण क्षेत्रों के 54 फीसदी परिवारों का तर्क है कि, उनके पास भी एक सप्ताह की समाग्री शेष बची है. राजधानी दिल्ली,पंजाब और कर्नाटक आदि राज्यों में लॉकडाउन का असर कम हुआ है. वहीं बिहार, हरियाणा, झारखंड आदि राज्यों में लॉकडाउन से लोगों का रोजगार प्रभावित हुआ है.

स्त्रोत सर्वे स्टडी :
यूर्निवर्सिटी ऑफ शिकागो में बूथ स्कूल ऑफ बिजनेस प्रोफेसर मैरिएन बर्टे्रड यूर्निवर्सिटी ऑफ पेंसिल्वेया में व्हार्टन स्कूल में सहायक प्रोफेसर हीथर शॉफिल्ड

1. आवेदन पत्र क्या होते हैं उदाहरण सहित।

2.कोरोना संकट में राशन नहीं मिलने पर आवेदन पत्र।

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