चंदवारा गांव : तीन सालों में ग्रामीणों की जुबां पर नहीं आया परेशानी शब्द

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शहर से गांव जाने का सुनकर टेंशन हो जाती है. कारण है कि, गांव में नेटवर्क ठीक से मिलेगा या नहीं. धूल बहुत उड़ती होगी. सड़के उखड़ी होगी. लेकिन उत्तर प्रदेश में एक ऐसा गांव मौजूद है. जहां पर सीसी टीवी कैमरे के साथ वाइफाई नेटवर्क भी फ्री है. आश्चर्य नहीं सच बता रहे हैं, उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से 50 किलोमीटर पूरब में स्थित चंदवारा गांव.

गांव की सूरत देखकर ही मन खुश हो जाता है. खास बात यह है कि, बीते तीन सालों से गांव के ग्रामीणों की जुबां पर परेशानी शब्द नहीं आया है. ग्रामीणों की परेशानी गायब करने में अहम रोल है. गांव के वाट्सएप ग्रुप का. जिसका नाम है, राइजिंग चंदवारा.

Chandwara village: In three years, the word of the villagers was not disturbed

गांव की नाली की ब्लॉकेज हो या कुड़े का ढेर या फिर टूटे हुए रोड की समस्या, जीनत बानो (22) को अब अपने गांव में कोई भी समस्या दिखती है तो वह तुरंत अपना मोबाइल निकाल कर उस फोटो को राइजिंग चंदवारा व्हाट्सएप्प ग्रुप में डाल देती है. ग्रुप में गांव की प्रधान के साथ-साथ सभी प्रशासनिक अधिकारी जुड़े हैं.

राइजिंग चंदवारा गांव का व्हाट्सएप्प ग्रुप बाराबंकी के चंदवारा गांव की महिला प्रधान प्रकाशिनी जायसवाल की पहल पर बनाया गया है. जायसवाल ने गांव में वाई-फाई, सीसीटीवी कैमरे भी लगवाएं हैं ताकि उनका गांव डिजिटल रूप से साक्षर हो सके और गांव की सुरक्षा पर कोई खतरा भी नहीं आए. डिजिटल रुप से शिक्षा की ओर बढ़ रहे गांव को पीएम और सीएम से सम्मान मिल चुका है. देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस गांव को पंचायती सशक्तिकरण पुरस्कार दिया था जबकि यहां की प्रधान प्रकाशिनी जायसवाल को राज्य सरकार की तरफ से रानी लक्ष्मीबाई पुरस्कार मिल चुका है.

लड़कियों के लिए साइकिल बैंक

ग्राम प्रधान ने गांव से बाहर पढऩे जाने वाली स्कूली लड़कियों के लिए एक साइकिल बैंक खोला है, जिसका उद्देश्य गरीब लड़कियों को मदद मिल सके. प्रधान बताती है कि, साइकिल के अभाव में बीते तीन साल पूर्व कई लड़कियों ने पढ़ाई अधूरी छोड़ दी थी. गांव में सीसीटीवी कैमरे की मदद से अपराधों पर काफी हद तक अकुंश लग चुका है. 8 सीसीटीवी कैमरे गांव की मुख्य सड़क पर लगाए गए हैं.

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