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Australia fires : ऑस्ट्रेलिया की भयानक आग, जिसमें 50 करोड़ जानवर जलकर मर गए

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ऑस्ट्रेलिया की भयानक आग, जिसमें 50 करोड़ जानवर जलकर मर गए | A terrible fire in Australia, in which 500 million animals died

भारत देश के दक्षिणी छोर से निकलने और दक्षिण पश्चिम की तरफ बढ़ते चलें जाने के बाद करीब 7,134 किलोमीटर आगे यात्रा कर ऑस्ट्रेलिया (Australia fires ) पहुंचा जा सकता है. द लैंड डाउन अंडर में आग से तबाही मची हुई है.क्योंकि बीते सितंबर 2019 से यहां के जंगल आग की चपेट में है. दुनिया इन्हें ऑस्ट्रेलियन बुशफायर नाम से पुकार रही है. 6 जनवरी 2019 को तापमान कई स्थानों पर 44 से 49 डिग्री सेल्सियस तक जा पहुंचा. इतना तापमान ग्रीष्म ऋतु में भीषण तपन देने योग्य है.

कैसे लगी ये आग?

ऑस्ट्रेलिया (Australia fires )में प्रतिवर्ष ग्रीष्म ऋतु में जंगलों में आमतौर पर आग लगती है. 6 सितंबर 2019 को सबसे पहले न्यू साउथ वेल्स के पास आग की भबकी. जिसके बाद से शुरु हुई ऑस्ट्रेलिया (Australia fires )में आग की तबाही जो आज तक चल रही है. भारत में भी ग्रीष्म ऋतु के दौरान जंगल में हर साल आग लगती है. जिसे भारत में दावानल कहा जाता हैं.

जंगलों में आग लगने का कारण होता है कि, सूखे पेड़ों की मात्रा बहुतायत में हो जाना. बिजली गिरने या आपस में सूखी लकड़ी में घषर्ण होने के कारण आग की शुरुआत होती है. जो पूरे जंगल में फैलती जाती है. जंगल में स्वत: लगी आग बारिश होने या जंगल के किसी नम इलाके में पहुंचने पर शांत हो जाती है. लेकिन ऑस्ट्रेलिया के जंगल में ऐसा नहीं हुआ.

दरअसल हुआ यूं है कि, बीते कई सालों से ऑस्ट्रेलिया में सूखे की स्थिति निर्मित हो रही है. साल 2019 मेंऑस्ट्रेलिया के पिछले दशक का सबसे सूखा वर्ष माना गया है. कारण सूखी हवा आग को फैलाने में मददगार साबित हुई. दूसरी ओर नवंबर 2019 में ऑस्ट्रेलियाई अधिकारियों ने एक 19 वर्षीय युवक को पकड़ा.

युवक पर आरोप थे कि, उसने विभिन्न स्थानों पर आग लगाई. जिससे आग अधिक भड़क गई. आग के मसले पर मौसम विज्ञानिकों का तर्क है कि, ऑस्ट्रेलिया के समीप मौजूद भारतीय महासागर का तापमान बीते दशक के मुकाबले अधिक बढ़ा है. पूर्व की ओर महासागर का तापमान कम है, जिसके चलते बारिश करने वाली हवाएं पूर्व की ओर बह रही हैं. बारिश करने वाली हवाएं ऑस्ट्रेलिया की ओर पहुंचने से रुक रही है.

कितना असर पड़ा है ऑस्ट्रेलिया की आग का?

ऑस्ट्रेलिया (Australia fires )में लगी आग से अब तक आठ लाख चालीस हजार स्क्वायर किलोमीटर के एरिया में नुकसान पहुंचा है. इतने स्क्वायर एरिया में पूरा पाकिस्तान समाहित हो सकता है. अनुमान लगाया गया है कि, करीब डेढ़ हज़ार घर बर्बाद हो चुके हैं आग से. साल 201 सितंबर से लेकर आज तक 26 लोगों आग से जान गवां चुके है. करीब 50 करोड़ जानवरों की मौत की रिपोट्स सामने आ रही है. आग को लेकर तरह-तरह के बयान आ रहे है, ऑस्ट्रेलिया के एक मिनिस्टर ने आग की तुलना एटॉमिक बम से कर दी है.

आग का सबसे अधिक अधिक दुनियाभर में मशहुर कोआला भालूओं पर पड़ा है. आग के चलते न्यू साउथ वेल्स के तीस फीसद कोआला भालू आग की चपेट में आकर मारे गए है. कंगारू आइलैंड के 50 फीसद कोआला के मारे जाने के समाचार सामने आ रहे हैं. आग की तबाही को शांत करने के लिए 3500 से ज्यादा लोग लगाए गए हैं, लेकिन आग पर इसका कोई असर नहीं हो रहा है. आग को काबू करने के लिए प्लेन का उपयोग किया जा रहा है. प्लेन की मदद से केमिकल और आग बुझाने वाले डिवाइस गिराए जा रहे है. जिसका आग पर कोई असर नहीं हो रहा है. आग का कहर इस कदर है कि, आसमान धधकती आग से नारंगी रंग का हो गया है. ऑस्ट्रेलिया से 1200 मील दूर बसे न्यूजीलैंड के आसमान आग से नारंगी हुए आसमान के रंग को देखा जा सकता है.

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बायीं तरफ जो तस्वीर है. इन चिंगारियों के उड़ने को एम्बर अटैक कहा जाता है. (तस्वीर साभार: Twitter)

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