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मध्य प्रदेश का ऐसा गांव जहां नहीं है सड़क, चारपाई पर अस्पताल पहुंचते है बीमार

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मध्य प्रदेश का ऐसा गांव जहां नहीं है सड़क, चारपाई पर अस्पताल पहुंचते है बीमार | A village in Madhya Pradesh where there is no road, people reach the hospital on the bed

नागदा। मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले में एक ऐसा गांव मौजूद हैं। जहां पर आजादी के बाद से सड़क नहीं बन सकी है। लिहाजा ग्रामीणों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। सबसे अधिक कष्ट दायक तब होता है, जब ग्राम भीलसुड़ा में कोई व्यक्ति बीमार पड़ जाता है। बीमार व्यक्ति को ग्रामीणों द्वारा चारपाई की सहायता से शहर में मौजूद अस्पताल तक पहुंचाया जाता है। दरअसल मंगलवार अलसुबह 70 वर्षीय आशाराम पिता बालाराम चंद्रवंशी की अचानक तबीयत बिगडऩे पर उसे अस्पताल ले जाना अति आवश्यक था।

ऐसे में बस्ती तक चार पहिया वाहन पहुंचने के लिए सड़क ही नहीं है। तो ग्रामीण बीमार बुर्जुग को चारपाई पर लेकर मुख्य सड़क तक पहुंचे। यहां फिर निजी वाहन के माध्यम से वड़ोदरा उपचार के लिए रवाना हुए। तब जाकर ग्रामीण को उपचार मिल सका। इन्हें जिन्होनें भी देखा व स्तंभ रह गया। क्योंकि सुबह कड़ाके की ठंड में बस्ती के लोगों का संर्घष बुर्जुग के लिए संजीवनी साबित हुआ। फिलहाल आशाराम का इलाज वड़ोदरा के अस्पताल में चल रहा है।

#मुख्य सड़क से 2 किमी का सफर

वैसे तो ग्राम भीलसुड़ा तक सड़क मार्ग है। लेकिन टुमनी के पास बसी हुई बस्ती तक सड़क मार्ग नहीं। दो पहिया वाहनों को भी 2 किमी के इस मार्ग पर संभलकर चलाना पड़ता है। क्योंकि बस्ती तक पहुंचने का रास्ता भी स्वयं लोगोंं ने ही बनाया था। चार माह पहले बारिश के दिनों में एक व्यक्ति अंबाराम की तबीयत बिगड़ गई थी। बारिश होने के कारण नाले उफान पर होने के कारण ग्रामीण उसे उपचार के लिए चारपाई पर लेकर अस्पताल पहुंचे लेकिन उन्होंने अस्पताल पहुंचने के पहले ही दम तोड़ दिया था। इस दौरान सड़क बनाने की मांग उठी थी। लेकिन जिम्मेदारों ने ध्यान नहीं दिया। बुधवार को दोबारा ग्रामीणों को संघर्ष से जूझना पड़ा।

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