नागदा में जिंदा है 108 साल पुरानी पंरपरा, देखने को दोबारा मिलेंगी आज

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नागदा. शहर में फूल डोल ग्यारस पर झांकियां निकाने की पंरपरा एक शताब्दी पुरानी है. झांकियां निकाले जाने की पंपरा की शुरुआत लक्कड़दास मंदिर से 108 वर्ष पूर्व ब्रह्मलीन लक्कड़दास बाबा द्वारा की गई थी. उन दिनों बैलगाड़ी पर झांकी निकाली जाती थी, करीब दो घंटे शहर के प्रमुख मार्गों पर घुमने के बाद दोबारा झांकी मंदिर ले जाती थी.

झांकियों का इतिहास करीब एक शताब्दी पुराना है. आजादी के पूर्व से यह पंरपरा चली आ रही है. समूचे मालवांचल मे ख्यात नागदा शहर में डोल ग्यारस के अवसर पर दो दर्जन झांकियां मुख्य मार्गों से होकर गुजरती है. झांकियों में पौराणिक कथा के दृश्यों को दर्शाया जाता है.

झांकियों में दो दर्जन अखाड़े कलाकार हैरत अंग्रेज प्रदर्शन कर दर्शकों को लुभाते है. झांकियों के कारवां में सबसे आगे शीतलानंद व्यायाम शाला चलेगा. जिसके पीछे लक्कड़दास मंदिर की झांकी रहेगी. झांकी के बाद पवनपुत्र अखाड़ा शामिल होगा. जिसके बाद बद्रीविशाल मंदिर की झांकी रहेगी. बाद में एक-एक कर झांकियों का कारवां शामिल होगा. कारवां थाना चौराहा, तिलक मार्ग, रामसहाय मार्ग, नपा चौराहा, पुराना बस स्टैंड,जवाहर मार्ग, शेषशायी चौक, किरण टॉकिज चौराहा, शीतला माता मंदिर चौराहा, दीनदयाल चौक, कन्याशाला चौराहा, एमजी रोड होते हुए दशहरा मैदान पहुंचेगा. यहां पर आरती के बाद समापन होगा.

दशहरा मैदान स्थित सत्यनाराण मंदिर, पोरवाल समाज की अगुवाई में बद्रीविशा मंदिर, 56 ब्लॉक स्थित राधा-कृष्ण मंदिर, प्रजापत समाज की अगुवाई में पटेल गली स्थित राधा कृष्णा मंदिर, पाड्ल्याकलां स्थित रामजानकी मंदिर, शिवपुरा कॉलोनी स्थित बाबा रामदेव मंदिर समेत अन्य ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाली झांकियों को भी शामिल किया जाएगा.

शहर में वर्ष 1968 से तत्कालीन हिंद केसरी दिवगंत मास्टर चंगी राम द्वारा शीतलानंद व्यायाम शाला से अखाड़ा निकालने की शुरुआत की गई थी. अखाड़ों के कारवां में सबसे आगे शीतलानंद व्यायाम शाला के कलाकार शामिल होते है. इसी प्रकार पवनपुत्र व्यायाम शाला द्वारा बीते 25 वर्षों से अखाड़ा निकाला जा रहा है. वहीं 64 ब्लॉक स्थित विकट व्यायामशाला, चेतनपुरा स्थित विजय हनुमान व्यायामशाला की अगुवाई में बीते 41 सालों से व्यायाम शाला का संचालन किया जाता है.

108 year old tradition is alive in Nagda, see you again today

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